बीबीएन, बीकानेर । भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में बढ़ती नशा तस्करी, ड्रोन गतिविधियों और सीमा पार अपराधों की चुनौतियों के बीच बीकानेर रेंज के आईजी ओमप्रकाश ने रविवार को सीमावर्ती समेजा क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने सीमा से जुड़े 41 पुलिस स्टेशन क्षेत्र के गांवों के प्रतिनिधियों, आमजन और बीएसएफ अधिकारियों के साथ बैठक कर नशा तस्करी रोकने में जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद समेजा में सीमा क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों (SHO) और वृत्ताधिकारियों (CO) की बैठक लेकर निगरानी, सूचना तंत्र और त्वरित कार्रवाई को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान श्रीगंगानगर एसपी हरिशंकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामेश्वर लाल सहित पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।
सीमा सुरक्षा में ग्रामीणों की भूमिका पर जोर
आईजी ओमप्रकाश ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग सुरक्षा तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु, ड्रोन गतिविधि, नशे की खेप या अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस और बीएसएफ को देने से बड़ी वारदातों को रोका जा सकता है। उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक रहने और अफवाहों से बचने की भी सलाह दी।
नशा तस्करी पर विशेष फोकस
बैठक में सीमा पार से होने वाली नशा तस्करी को प्रमुख चुनौती बताया गया। पिछले कुछ वर्षों में पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों और हथियारों की खेप भेजने के कई मामले सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब पारंपरिक निगरानी के साथ तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचना नेटवर्क को भी मजबूत कर रही हैं।
SHO और CO को दिए सख्त निर्देश
समेजा में आयोजित पुलिस अधिकारियों की बैठक में आईजी ने कहा कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। थाना स्तर पर मुखबिर तंत्र मजबूत करने, रात्री गश्त बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई करने और बीएसएफ के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को संवेदनशील गांवों की विशेष निगरानी करने को भी कहा गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?
बीकानेर रेंज के अंतर्गत आने वाले श्रीगंगानगर, अनूपगढ़ और बीकानेर जिले का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। हाल के वर्षों में सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से नशा तस्करी, हथियारों की सप्लाई और संदिग्ध गतिविधियों के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में पुलिस, बीएसएफ और स्थानीय समुदाय के बीच समन्वय बढ़ाने की रणनीति को सुरक्षा विशेषज्ञ भी प्रभावी मानते हैं।



