बीबीएन,बीकानेर। चेक अनादरण के दो अलग-अलग मामलों में बीकानेर स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के लेक्चरर हमीद अली को अदालत ने दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में दो-दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने दोनों मामलों में अलग-अलग लाखों रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड का भुगतान न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण) संख्या-2, बीकानेर की अदालत ने सुनाया, जिसमें दोनों मामलों में आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी पाया गया।
पहले मामले में 10 लाख का जुर्माना
अदालत के अनुसार, पहले मामले में हमीद अली को 2 वर्ष का साधारण कारावास और 10 लाख रुपये का अर्थदंड दिया गया। यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त 6 माह का कारावास भुगतना होगा।
दूसरे मामले में भी दोष सिद्ध
दूसरे प्रकरण में भी अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 2 वर्ष की सजा सुनाई। इसके साथ ही 2 लाख 36 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में 3 माह का अतिरिक्त कारावास निर्धारित किया गया है।
दोनों मामले एक ही परिवादी से जुड़े
दोनों मामलों में परिवादी मनोज कुमार सोनी थे, जिनकी ओर से अधिवक्ता गुलाब चंद मारू और भगवान मारू ने अदालत में पैरवी की। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर दोनों मामलों में आरोपी को दोषी ठहराया।
क्या है धारा 138 एनआई एक्ट
परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत, यदि किसी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया चेक बैंक में प्रस्तुत होने पर अपर्याप्त धनराशि या अन्य कारणों से बाउंस हो जाता है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है। इसमें कारावास और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है।
वित्तीय लेन-देन में जिम्मेदारी जरूरी
अदालत के इस फैसले को वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि चेक जारी करने में लापरवाही या धोखाधड़ी को कानून गंभीरता से लेता है।


