बीबीएन, बीकानेर। इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर अगले सप्ताह होने वाली बैठक से पहले व्यापक सुझाव और मांगें सामने आई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र आर्य के अनुसार इनमें पोंग डैम एवं थीन डैम के जलस्तर की पुनर्समीक्षा, राजस्थान के लिए वैज्ञानिक एवं स्थिर जल आवंटन व्यवस्था, रबी-खरीफ फसलों के लिए समय पर रेग्यूलेशन तय करने, बीबीएमबी में राजस्थान के प्रशासनिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने, हरीके हेडवर्क्स की क्षमता बढ़ाने, टेल क्षेत्र के किसानों के लिए राहत पैकेज तथा इंदिरा गांधी नहर प्रणाली में संरचनात्मक सुधार जैसे विषय प्रमुख हैं। कृषि विशेषज्ञों और किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि इन मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो सीमावर्ती जिलों की सिंचाई व्यवस्था और कृषि उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
पोंग डैम के जलस्तर और जल आवंटन नीति में बदलाव की मांग
बैठक से पहले प्रस्तुत सुझावों में कहा गया है कि पोंग डैम का अधिकतम जलस्तर पूर्व निर्धारित 1410 फीट तक रखा जाए। वर्तमान में इसे 1390 फीट तक सीमित रखने से राजस्थान के हिस्से के जल प्रबंधन पर प्रतिकूल असर पड़ने की बात कही गई है। इसी प्रकार थीन डैम के पूर्ण भराव स्तर में की गई कमी की भी समीक्षा की मांग उठाई गई है। सुझावों में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक वर्ष 21 सितम्बर को जल गणना करते समय 20 मई के संभावित जलस्तर का वैज्ञानिक आकलन कर राजस्थान के लिए पर्याप्त जल आवंटन सुनिश्चित किया जाए, जिससे मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी व्यर्थ पाकिस्तान की ओर न छोड़ा जाए और किसानों को सिंचाई संकट का सामना न करना पड़े।
फसल चक्र के अनुसार स्थायी रेग्यूलेशन की जरूरत
कृषि हितों को ध्यान में रखते हुए मांग की गई है कि रबी और खरीफ दोनों मौसमों के लिए जल वितरण का रेग्यूलेशन बुवाई से पहले तय किया जाए और बाद में उसमें बदलाव नहीं किया जाए। किसानों का तर्क है कि फसल बोने के बाद जल आपूर्ति में परिवर्तन होने से उत्पादन प्रभावित होता है और आर्थिक नुकसान बढ़ता है।
हरीके हेडवर्क्स पर भी उठे सवाल
प्रस्ताव में कहा गया है कि लंबे समय से बीबीएमबी के प्रशासनिक ढांचे में राजस्थान का कोई प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं है। इससे राज्य के अभियंताओं और अधिकारियों को समन्वय स्थापित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही हरीके हेडवर्क्स की वर्तमान क्षमता को इंदिरा गांधी फीडर नहर की डिजाइन क्षमता के अनुरूप बढ़ाने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा डिस्चार्ज क्षमता भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है, इसलिए अतिरिक्त गेट और नए ढांचे का निर्माण आवश्यक है।
टेल क्षेत्र के किसानों के लिए राहत पर जोर
सुझावों में नहर प्रणाली के अंतिम छोर यानी टेल क्षेत्र के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग भी शामिल है। इसमें डिग्गी निर्माण, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर अतिरिक्त अनुदान, बीज-खाद सहायता, सौर ऊर्जा संयंत्रों को प्राथमिकता तथा आधारभूत विकास कार्यों में विशेष महत्व देने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही हैड और टेल गेजों के वैज्ञानिक रखरखाव, सभी मोघों का तकनीकी विवरण सार्वजनिक करने, सिल्ट सफाई के लिए समय पर बजट जारी करने तथा मानसून के अतिरिक्त पानी को एस्केप पॉन्ड में संरक्षित करने जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।





