बलजीत गिल.
बीबीएन, बीकानेर | नारी सुरक्षा के सरकारी दावों पर अगर भरोसा करना है तो बीकानेर रेंज के ये ताज़ा आंकड़े आपको पहले देखने होंगे। बीकानेर रेंज में हर दिन औसतन दो महिलाओं की आबरू से खिलवाड़ हो रहा है। वर्ष 2023, 2024 और 2025 (नवंबर तक) के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि चार जिलों वाली बीकानेर रेंज में दुष्कर्म के साथ हत्या के 13, बालिग महिलाओं से जुड़े दुष्कर्म के 1606 और नाबालिगों के साथ दुष्कर्म के 587 मामले दर्ज हुए।
काग़ज़ों में कुल मामलों में 18 से 19 प्रतिशत की गिरावट दिखाई जाती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि श्रीगंगानगर बालिग और नाबालिग दोनों दुष्कर्म मामलों में शीर्ष पर बना हुआ है, बीकानेर अब भी दुष्कर्म के साथ हत्या जैसे जघन्य अपराधों में आगे है, जबकि चूरू सबसे कम आंकड़ों के बावजूद सुरक्षित होने का प्रमाण पत्र नहीं पा सकता। सवाल यह नहीं कि संख्या घटी या बढ़ी, सवाल यह है कि जब हर साल सैकड़ों घटनाएं दर्ज हो रही हों, तब कानून व्यवस्था और सिस्टम की “सख़्ती” किस फाइल में बंद है? नारी सुरक्षा के दावे यहां राहत नहीं, बल्कि एक तल्ख़ तंज बनकर खड़े नज़र आते हैं।
बीकानेर रेंज में अपराध का आईना:
🔴 दुष्कर्म के साथ हत्या
प्रथम जिला: बीकानेर
वर्ष 2023–2025 के कुल मामलों में बीकानेर शीर्ष पर रहा।
सबसे कम: श्रीगंगानगर
2024 और 2025 में शून्य मामले दर्ज, यानी इस श्रेणी में न्यूनतम।
➡️ संकेत: यह अपराध दुर्लभ है, लेकिन जहां हुआ—वह प्रशासनिक विफलता का गंभीर संकेत देता है।
🔴 दुष्कर्म (बालिग)
प्रथम जिला: श्रीगंगानगर
तीन वर्षों में सर्वाधिक 164 मामले (2025 तक), रेंज में पहला स्थान।
सबसे कम: चूरू
लगातार तीनों वर्षों में तुलनात्मक रूप से सबसे कम मामले।
➡️ संकेत: बड़ी आबादी या शहरीकरण को ढाल बनाकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
🔴 दुष्कर्म (नाबालिग)
प्रथम जिला: श्रीगंगानगर
2025 में 59 मामलों के साथ चिंताजनक बढ़त।
सबसे कम: हनुमानगढ़
तीन वर्षों के कुल आंकड़ों में सबसे नीचे।
➡️ संकेत: नाबालिगों के खिलाफ अपराध में बढ़ोतरी सीधे सामाजिक और प्रशासनिक असफलता की ओर इशारा करती है।
📊 कुल अपराध (तीनों श्रेणियां मिलाकर)
सबसे अधिक अपराध वाला जिला: श्रीगंगानगर
सबसे कम अपराध वाला जिला: चूरू
आंकड़े यह साफ़ कहते हैं कि अपराध केवल संख्या नहीं होते, वे नीतियों की नाकामी और ज़मीनी हकीकत का दस्तावेज़ होते हैं। कहीं गिरावट राहत देती है तो कहीं बढ़ोतरी सवाल खड़े करती है। महिला और बाल सुरक्षा के दावों के बीच ये आंकड़े पूछते हैं—
क्या अपराध घटे हैं, या सिर्फ़ आंकड़ों में सिमट गए हैं?
बीकानेर रेंज की यह रिपोर्ट चेतावनी है कि कानून का डर बराबर नहीं, और सुरक्षा का भरोसा भी।




