बीबीएन, नेटवर्क | भीड़भाड़ वाले बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर अब “एक जरूरी कॉल” का बहाना बनाकर लोगों को निशाना बनाने वाला एक नया साइबर फ्रॉड तेजी से फैल रहा है। राजस्थान में इस तरह की घटनाओं में वृद्धि के बाद पुलिस ने अलर्ट जारी किया है। ठग भावनात्मक कहानी गढ़कर पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर मोबाइल हाथ में आते ही कुछ सेकंड में कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कर OTP और बैंकिंग एक्सेस हासिल कर लेते हैं। कई मामलों में स्पाइवेयर और की-लॉगर के जरिए पीड़ित की निजी जानकारी भी चोरी की जा रही है।
कैसे काम करता है ‘एक कॉल’ वाला फ्रॉड?
साइबर अपराधी सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे लोगों को चुनते हैं जो मदद करने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं। वे खुद को परेशान या आपात स्थिति में दिखाकर फोन मांगते हैं। कभी बैटरी खत्म होने, तो कभी किसी परिजन की तबीयत खराब होने का बहाना बनाया जाता है। जैसे ही मोबाइल उनके हाथ में आता है, वे एक विशेष कोड डायल कर देते हैं। इससे कॉल फॉरवर्डिंग चालू हो जाती है और आपके फोन पर आने वाले OTP सीधे ठग के नंबर पर पहुंचने लगते हैं। इसके बाद वे बैंक खाते, UPI ऐप या सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच बना लेते हैं और बिना जानकारी के पैसे निकाल लेते हैं।
खतरा यहीं खत्म नहीं होता
कई मामलों में ठग मोबाइल में स्पाइवेयर या की-लॉगर इंस्टॉल कर देते हैं, जिससे पासवर्ड, बैंक डिटेल और निजी बातचीत तक रिकॉर्ड हो जाती है। इसके अलावा, वे आपके कॉन्टैक्ट्स चुरा लेते हैं और आपके परिचितों को “इमरजेंसी” संदेश भेजकर उनसे भी पैसे ऐंठ लेते हैं।
पुलिस की चेतावनी और सलाह

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने लोगों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति को अपना फोन न दें, चाहे वह कितनी भी आपात स्थिति का हवाला दे। यदि मदद करनी हो तो खुद कॉल डायल कर स्पीकर पर बात कराएं।
कैसे बचें इस ठगी से?
- अनजान व्यक्ति को मोबाइल देने से बचें।
- किसी भी कोड (*21#, ##002# आदि) को डायल न करें।
- कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग समय-समय पर जांचें।
- OTP, पासवर्ड या बैंक जानकारी किसी से साझा न करें।
- संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत करें।


