बीबीएन, नेटवर्क। राजस्थान सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। परियोजना निदेशक, RGHS कार्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में IPD, OPD और डे-केयर उपचार के लिए तैयार की गई विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था 1 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि SOPs की अवहेलना, ओवरबिलिंग, अनियमितता या गलत जानकारी देने पर संबंधित अस्पतालों, मेडिकल स्टोर्स और डायग्नोस्टिक केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में एकरूपता और पारदर्शिता पर जोर
जारी आदेश के अनुसार, RGHS के अंतर्गत लाभार्थियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को मानकीकृत और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से IPD, OPD और डे-केयर उपचार के लिए विस्तृत SOPs को अंतिम रूप दिया गया है। इन नियमों का पालन अब सभी पैनलबद्ध अस्पतालों, फार्मेसी स्टोर्स, डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्रों के लिए अनिवार्य होगा।
अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को दिए गए सख्त निर्देश
सर्कुलर में कहा गया है कि सभी पैनलबद्ध स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (HCNPs) को SOPs में निर्धारित प्रावधानों, प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देशों का गहन अध्ययन कर उनका कड़ाई से पालन करना होगा। इसके साथ ही संस्थानों को अपने चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को SOPs के बारे में प्रशिक्षित और जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कठोर कार्रवाई
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण, दवा वितरण, बिलिंग, अनुमोदन और क्लेम प्रोसेसिंग से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां संबंधित अस्पतालों, फार्मेसी स्टोर्स और डायग्नोस्टिक केंद्रों की होंगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता, गलत प्रस्तुतीकरण, ओवरबिलिंग या SOPs का उल्लंघन पाया जाता है तो RGHS नियमों के तहत सस्पेंशन, डी-एम्पैनलमेंट और रिकवरी जैसी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
लाभार्थियों को मिलेगा बेहतर उपचार
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि नई SOP व्यवस्था लागू होने से उपचार प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, अनावश्यक विवादों में कमी आएगी और RGHS लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही चिकित्सा संस्थानों की जवाबदेही भी पहले से अधिक सुनिश्चित होगी।



