बीबीएन, नेटवर्क 31 अगस्त। भारतीय सेना की सप्लाई यूनिट आर्मी सर्विस कॉर्प्स (ASC) के एक वरिष्ठ अधिकारी को भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया गया है। समरी जनरल कोर्ट मार्शल (SGCM) ने कर्नल विकास पांडे को 6 वर्ष की कड़ी कैद (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाते हुए ‘कैशियरिंग’ की सख्त कार्रवाई भी की है।
कौन हैं कर्नल पांडे?
कर्नल विकास पांडे लद्दाख में 503 ASC बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर रहे हैं। यह यूनिट 3 इन्फैंट्री डिवीजन के अधीन कार्यरत है।
कब और कैसे चली कार्यवाही?
SGCM की सुनवाई 16 फरवरी से शुरू होकर 16 अगस्त की देर रात तक चली। यह पूरी प्रक्रिया चंडीगढ़ स्थित एन-एरिया में हुई। कोर्ट की अध्यक्षता एक ब्रिगेडियर ने की, जबकि तीन कर्नल सदस्य इसकी पीठ का हिस्सा रहे।
क्या थे आरोप?
अधिकारी पर कुल सात गंभीर आरोप लगे, जिनमें सभी में उन्हें दोषी ठहराया गया। आरोपों में रेजिमेंटल फंड खाते का अनुचित संचालन और बटालियन की सील का दुरुपयोग, 63.66 लाख रुपये की हेराफेरी,लद्दाख में 4 लाख रुपये रिश्वत लेना, जयपुर में घोषित आय से अधिक 32.60 लाख रुपये का फ्लैट खरीदना, पत्नी के नाम पर 48.48 लाख रुपये की BMW कार खरीदना, 21 लाख रुपये नकद प्राप्त करना शामिल है।
कानूनी धाराएं और प्रक्रिया
मामले की शुरुआत कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी और समरी ऑफ एविडेंस से हुई। इसके बाद SGCM ने सुनवाई की। आरोपों में आर्मी एक्ट की धारा 52(f) (धोखाधड़ी की मंशा से कार्य) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराएं शामिल की गईं।
अधिकारी की कानूनी कोशिशें
कर्नल पांडे ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत ने साफ किया कि उनकी सजा का अंतिम निर्णय सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) की सुनवाई पर निर्भर करेगा।
क्या है ‘Cashiering’?
‘कैशियरिंग’ सेना में सबसे कठोर अनुशासनात्मक दंड माना जाता है। इस प्रक्रिया में अधिकारी को अपमानजनक तरीके से सेवा से हटाया जाता है और उसकी वर्दी, रैंक और सम्मान भी छीन लिया जाता है।
