⭕ तीन सिम से अधिक पर रोक: साइबर ठगी रोकने के लिए हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
बीबीएन, नेटवर्क। जोधपुर हाईकोर्ट ने साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर अभूतपूर्व हस्तक्षेप करते हुए कई सख्त व दूरगामी आदेश जारी किए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अब किसी भी व्यक्ति के नाम पर तीन से अधिक सिम कार्ड जारी नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल, ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया उपयोग के लिए राज्यस्तरीय SOP तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
84 वर्षीय बुजुर्ग दंपती से करीब 2 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज करते हुए न्यायमूर्ति रवि चिरानिया ने राज्य सरकार, पुलिस, बैंकिंग और फिनटेक संस्थानों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। अदालत ने गृह विभाग को आदेश दिया कि वह भारतीय साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की तर्ज पर राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की स्थापना करे और DG साइबर के अधीन विशेष आईटी इंस्पेक्टरों की भर्ती सुनिश्चित करे, जिनका अन्य विभागों में तबादला नहीं किया जाएगा।
साइबर ठगी पर बैंक–फिनटेक को कड़े निर्देश
साइबर अपराधों में बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग को मुख्य कारण मानते हुए हाईकोर्ट ने सभी बैंक और फिनटेक कंपनियों को RBI द्वारा विकसित ‘Mule Hunter’ जैसे AI टूल्स का उपयोग अनिवार्य करने का निर्देश दिया, जिससे म्यूल अकाउंट, संदिग्ध लेनदेन और पूर्व अपराध पैटर्न की पहचान तुरंत हो सके। जिन खाताधारकों की वार्षिक बैंकिंग गतिविधि 50 हजार रुपये से कम है या जिनकी डिजिटल साक्षरता सीमित है, उनके लिए UPI और इंटरनेट बैंकिंग लिमिट पर कठोर नियंत्रण की अनुमति दी गई है ताकि वे उच्च जोखिम वाली ट्रांजैक्शन से सुरक्षित रहें।
डिजिटल अरेस्ट रोकने के लिए अलग SOP
हाईकोर्ट ने हाल के वर्षों में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि सभी बैंक, फिनटेक कंपनियां और वित्तीय संस्थान संयुक्त SOP तैयार करें, जिसमें संदिग्ध कॉल, कथित एजेंसियों के नाम पर की जाने वाली धमकी, फर्जी वीडियो कॉल और खाते फ्रीज करने की झूठी जानकारी पर रोकने के उपाय शामिल हों।
डिजिटल डिवाइसेज व गिग वर्कर्स पर नया नियम
राजस्थान में बेचे जाने वाले सभी डिजिटल डिवाइस (नए/पुराने) की बिक्री और रजिस्ट्रेशन अब DG साइबर की निगरानी में होगा ताकि चोरी, अनट्रेस्ड रीसेलिंग और फर्जी पहचान का दुरुपयोग रोका जा सके। इसके साथ ही ओला, उबर, स्विगी, जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। अदालत ने सभी सरकारी विभागों में डिजिटल ट्रांजैक्शन का मासिक ऑडिट भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

