बीबीएन,बीकानेर। बीकानेर में आयोजित गुरुदेव सियाग सिद्धयोग एवं ध्यान कार्यक्रम के दौरान साधकों ने ध्यान के बीच स्वतः होने वाली यौगिक क्रियाओं का अनुभव किया। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के टाउनहॉल (किसान घर) में आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के कर्मचारियों एवं रेंजर्स ने भाग लिया। कार्यक्रम में संजीवनी मंत्र के सामूहिक श्रवण और ध्यान साधना के दौरान कई प्रतिभागियों के शरीर में स्वतः आसन, मुद्राएं, बंध एवं प्राणायाम जैसी योगिक क्रियाएं होने लगीं, जिसने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था के प्रतिनिधि श्री जयदीप राठौड़ ने समर्थ सद्गुरु श्री रामलाल जी सियाग के सिद्धयोग दर्शन एवं उसकी आध्यात्मिक पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सिद्धयोग साधना में गुरुकृपा एवं मंत्रशक्ति के माध्यम से साधक के भीतर सुप्त आध्यात्मिक ऊर्जा का जागरण होता है।
प्रायोगिक सत्र के दौरान उपस्थित रेंजर्स एवं कर्मचारियों को गुरुदेव की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र सुनाया गया तथा लगभग 15 मिनट का सामूहिक ध्यान करवाया गया। ध्यान के दौरान अनेक साधकों को उनके शरीर की आंतरिक आवश्यकता के अनुसार स्वतः विभिन्न यौगिक क्रियाएं अनुभव हुईं। इनमें आसन, बंध, मुद्राएं तथा प्राणायाम जैसी प्रक्रियाएं प्रमुख रहीं।
कार्यक्रम के दौरान साधकों ने सिद्धयोग साधना से जुड़े विभिन्न प्रश्न भी पूछे, जिनका संस्था के प्रतिनिधियों ने विस्तार से समाधान किया। आयोजकों के अनुसार इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं ध्यान कार्यक्रम व्यक्ति के मानसिक संतुलन, आत्मिक विकास और आंतरिक शांति के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रतिभागियों ने संतोष व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक एवं ध्यान शिविरों के आयोजन की अपेक्षा जताई।



