बीबीएन, बीकानेर। जिले के खाजूवाला क्षेत्र से सामने आया मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा है। एक अनुसूचित जाति के होटल संचालक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने न सिर्फ स्थानीय पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की संवेदनशीलता और निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। अवैध वसूली, झूठे मुकदमे, मारपीट और जातिसूचक गालियों जैसे संगीन आरोपों के बाद क्षेत्र में उबाल है और मजहबी सिख समाज सहित एससी-एसटी, ओबीसी व अल्पसंख्यक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है।
रेड के नाम पर दबाव, खाली हाथ लौटी पुलिस
परिवादी राजेंद्र सिंह का आरोप है कि 1 जुलाई 2025 को खाजूवाला पुलिस ने उनके होटल पर रेड डाली, लेकिन घंटों चली तलाशी के बावजूद पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा। इसके बावजूद अधिकारियों ने उन्हें ‘दो नंबर का काम’ करने वाला बताकर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया और अवैध वसूली का खेल शुरू हो गया।
एक लाख की मांग, नहीं तो झूठे केस की धमकी
आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने खुलेआम एक लाख रुपये की मांग की और रकम न देने पर फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। परिवादी का दावा है कि यह रकम एक तीसरे व्यक्ति के माध्यम से ली गई, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग तक मौजूद है। सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं तो पुलिसिया वसूली का यह खेल कब और किसके संरक्षण में चलता रहा?
एनडीपीएस केस की बरामदगी पर संदेह
मामला तब और गंभीर हो गया जब राजेंद्र सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज कर दिया गया। परिवादी का कहना है कि जिस स्थान से कथित बरामदगी दिखाई गई, उस समय वे पुलिस के साथ होटल में मौजूद थे। हैरानी की बात यह है कि एक पुलिसकर्मी के न्यायालय में दिए गए बयान के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश तक जारी हो चुके हैं।
जातिसूचक गालियां और मारपीट का आरोप
संगठनों का आरोप है कि जब परिवादी ने राजीनामा करने से इनकार किया तो पुलिस ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, विरोध करने पर एक अन्य व्यक्ति को भी कथित तौर पर झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया।
जमीन विवाद में भी पुलिस की संदिग्ध भूमिका
मामले में एक पुराने जमीन विवाद को लेकर भी पुलिस पर पक्षपात और दबाव की राजनीति करने के आरोप लगे हैं। बताया गया कि बिना जमीन मालिक की मौजूदगी के एफआईआर दर्ज करवाई गई, जिसे बाद में गलत पाए जाने पर बंद करना पड़ा।
संगठनों का दो टूक अल्टीमेटम
अखिल राजस्थान मजहबी सिख महासभा और अन्य संगठनों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि—
⭕ पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ व निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए
⭕ आरोपित पुलिसकर्मियों को तत्काल लाइन हाजिर किया जाए
⭕ सभी मामलों में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएं
संगठनों ने दो टूक कहा है कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
पुलिस की चुप्पी, संदेह और गहराया
इतने गंभीर और सनसनीखेज आरोपों के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। पुलिस की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और पूरे प्रकरण को और भी संदिग्ध बना रही है। अब देखना यह है कि कानून के रखवाले खुद कानून के कटघरे में खड़े होकर जवाब देते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



